Monday, November 17, 2008

ऐ दोस्त

एक अरसा हुआ ऐ दोस्त तुम्हें मिले हुए
एक अरसा हुआ है आपका हाल ऐ दिल सुने हुए
शुक्र है मिले हो आज फुर्सत से यहाँ
एक अरसा हुआ है ऐ दोस्त तुम्हें तलाश करते हुए

जिस तरह तुम मुःह फेर गुमशुदा हो गए
सोचा ना था कि मुलाक़ात होगी कभी
बीती बातों को नहीं छेढूंगा
माफ़ी मांगने का मौका दो तो सही

नज़र नियाज़ करता हूँ तुम्हारी हिम्मत पर
फक्र करता हूँ कि तुम खून के असूं पी तो गए
झेल गए तुम चुप चाप उन तकलीफों को
मुसक्रुराते तुम जी तो गए

हाथ बढाता हूँ तुम्हारी और,
शायद तुम्हें सहारे की ज़रूरत नहीं
ज़रूरत है हमें आप की दोस्ती की
और कोई मंज़ूर नहीं

बहुत तकल्लुफ उठायें हैं हमारी गलतियों के
जो कर चुके तुम्हारी ज़िन्दगी को तबाह
तवज्जो देना हमें भी कभी
निभा सकें दोस्ती इक दोस्त की तरह

थे यहीं, यहीं रहेंगे
आवाज़ दे देना हमको, हिचकिचाना नहीं
तुम्हारे न हो सके तो क्या
रहेंगे हमेशा तुम्हारे लिए

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