Wednesday, May 27, 2009

इक अजनबी, झोंका सा बन आकर चला गया
अपने होने का एहसास दिला कर चला गया
धुन्दला सा चेहरा दिखा कर कुछ लम्हे
मुलाकात के बढा कर चला गया

क्या चाहता था, जानता नहीं
लेकिन वो मेरे वजूद का हिस्सा बनकर चला गया
तोड़ गया इक टहनी
अपने से जोड़ते चला गया

उसके वजूद का हिस्सा क्या मैं
मेरे वजूद का हिस्सा क्या वो
बे-एहसास वो आया था
बे-एहसास वो चला गया

Tuesday, May 19, 2009

छोड़ी न उंगलियाँ, ना माँ ने, ना पिता ने
ऐ खुदा तू मझदार में मुझे क्यों छोड़ जाता है
मुश्किलों में छोड़ा साथ सबने
ऐ खुदा तू मुझे क्यों छोड़ जाता है

Friday, May 15, 2009

बीती बातों,
बहकी बातें,
कैसी बातें,
तुझे मैं क्या बताऊँ
उलटी सीधी,
वो मुलाकातें कैसे मैं याद दिलाऊँ
वो खामोशी,
वो मुस्कुराहटें कैसे मैं वापिस लाऊँ
बीती बातों,
बहकी बातें,
कैसी बातें,
तुझे मैं क्या बताऊँ

भूली भुलाई,
वो सौगाते रातों की वो बरसातें,
को कैसे मैं भुलाऊँ
छुपती छुपाती,
वो मुलाकातें,
मिलती बिछ्ड्ती उन नज़रों को कैसे भुलाऊँ
आती जाती,
वो यादें,
उभरती बहती,
वो चाहतों को कैसे मैं भुलाऊँ
बीती बातों,
बहकी बातें,
कैसी बातें,
तुझे मैं क्या बताऊँ

Thursday, May 7, 2009

गवाहों की क्या ज़रूरत, जब ख़ुद के कातिल हम हैं
जाने किन वादों पर जीते रहे, झूठे तो हम हैं
क्या निकलेगी आह किसी पर, ख़ुद को न संभाल पाये
दुआ मांगते तो रहे, पर दो रस्ते पर खड़े हम हैं