Friday, November 21, 2008

खुशियों के आने में वक्त है अभी

आईने के टुकड़े बिखरे नज़र आए
उन टुकडों में, मैं बिखरा नज़र आया

इक इक टुकडा उठा जोड़ने की कोशिश करता हूँ
इक इक कतरा लहू का रोकने की कोशिश करता हूँ

बिखरे हैं कई ज़ख्म काइनात में अभी
ज़ख्म भरने में वक्त लगेगा जानता हूँ

चिपकेंगे कब यह टुकड़े, पुरा होगा कब यह सपना
खुशियों के आने में वक्त है जानता हूँ

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