मुश्किल है जीना तकदीरों पे, लिखा क्या है उन लकीरों पे
समझ में न आए यह साजिश तेरी, फूल क्यों लटकाए है मेरी तस्वीरों पे
कत्ल ना कर दो मेरा, कुछ ख्वाईशें है बाकी
भटक गए है रास्तों से, मेरी मोहब्बत का पता तो बताओ साकी
पी लो कुछ घूँट और खून के यारों बेहोश होना है बाकी
हकीक़त में तो वो मिले नहीं, बेहोशी में ही नज़र जाती
लुत्फ़ उठाये थे उन लम्हों के, थे जो वो मेरे साथ
गुमशुदा हुए जब से वो, लगता है बहुत लंबी रात
उड़ जाऊं हवाओं में उस के दुपट्टे की तरह, फिक्र न रहे कोई
अब तो पी चुका हूँ बहुत यारों, नब्ज़ में अब धड़कन न रही
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