ख्वाइशें बढती चली गयीं,
एहसास और असलियत का फासला कब दूर होगा ?
यादाश्त में तस्वीरें रह गयीं,
मोहब्बत और दर्द का फासला कब दूर होगा ?
चाह तो चाह रही,
इंसान होने का क़र्ज़ कब दूर होगा ?
भटकते रहे इन काफिलों के साथ,
राह और मंजिल का फासला कब दूर होगा ?
उम्र गुजरी है उम्मीदों पर लेकिन,
ज़िन्दगी से मौत का फासला कब दूर होगा ?
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