Thursday, April 29, 2010

उनके होने न होने का क्या गम करें,
ज़िन्दगी तो बस यूं ही चली जाएगी
दिल को सहलाने को दो आवाज़ और दे देंगे,
और ज़िन्दगी बस यूं ही चली जाएगी

साथ हर कदम पर हो कोई यह नामुमकिन है
लेकिन मिलते मिलते ज़िन्दगी यूं ही चली जाएगी
कुछ दिन और हैं हम यहाँ दोस्त, हाथ बाधा
वर्ना तनहा यूं ही ज़िन्दगी निकल जाएगी
इक पल न रुके ज़िन्दगी, रुके हुए तो हम हैं
उनके कहे पर इस किनारे रुके हम हैं
बहेती हुई नदी किनारे, कई आये कई गए
उनके चेहरे की इक नज़र के लिए बेक़रार हम हैं