Friday, November 14, 2008

तड़प

चाह बिना तड़प कैसी
रह बिना झड़प कैसी
इन उदासियों का साथ नहीं
तो रहत कैसी

कट जाएँगी कई उम्रें
मिलेगी खुशी और गम भी
जो ना मिला इल्म खुशी का
तो दर्द की इन्तहा ही सही

1 comment:

  1. तड़प

    चाह बिना तड़प कैसी
    रह बिना झड़प कैसी
    इन उदासियों का साथ नहीं
    तो रहत कैसी

    कट जाएँगी कई उम्रें
    मिलेगी खुशी और गम भी
    जो ना मिला इल्म खुशी का
    तो दर्द की इन्तहा ही सही

    ....kyaaa bbbaaat hai....!! Waah..!
    ..Bilkul sahi farmaaya...!

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