करीब आ कर चले क्यों गए
यूँ सता कर चले क्यों गए
चाहत बरक़रार है जानते है सभी
बेवफाई की वजह बिन बताये चले क्यों गए
मरासिम पुराने नहीं पर इकरार तो है
तकल्लुफ है, जानते हैं, निकाब तो है
मिलेगा कभी वक्त इंतज़ार करेंगे
तूफ़ान में न छोड़ोगे इमां तो है
मददगार-ऐ-जुर्म बनेंगे हम भी कभी
सज़ा-ऐ-जुर्म सहेंगे हम भी कभी
मिल जाए हमें साझी तुम्हारी
सजा-ऐ-मौत मंज़ूर हमें भी कभी
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