Monday, April 20, 2009

इक ख्वाब में जन्मा, इक ख्वाब में गुज़र जाऊँगा
ख्वाब ही है लेकिन, मैं इक ख्वाब के लिए जिए चला जाऊँगा
कुछ अरसे से बूंदों ने भिगोया इस सुखी धरती को
कुछ बूंदों से मैं जलती मशाल बुझा जाऊँगा
कुछ सूखे पत्ते उन पन्नों से पलटे उम्र से उड़ते ही चले गए
सूखे उन पत्तों को उन खाली पन्नों को कभी पूरा न कर पाऊँगा

ख्वाब तो था हकीकत न समझ पाया आँख बंद कर चलता चला गया
ऊँगली ज़िन्दगी की पकड़ चलता चला गया
उन ख़्वाबों को इन आंखों में बंद कर चलता चला गया
मंजिल का क्या है पहुँचा तो क्या हुआ न पहुँचा तो क्या हुआ
नकारा जो खुदा ने तो क्या हुआ
इन ख़्वाबों को ही जन्नत समझ चलता चला गया

इक ख्वाब में जन्मा, इक ख्वाब में गुज़र जाऊँगा
ख्वाब ही है लेकिन, मैं इक ख्वाब के लिए जिए चला जाऊँगा

Friday, April 17, 2009

छुपे उस चेहरे को देखने की जाने कितनी कोशिश की मैंने
पहचाना सा था करीब से जानने की कोशिश की मैंने
इक परदे की दूरी पे वो थे परदे को हटाने की कोशिश की मैंने
नामुमकिन यूं होगा जाना न था, ज़माने से छुप छुपा कर कोशिश की थी मैंने
आज लुटा लुटा सा फिरता हूँ, तुझे पाने की कोशिश जो की थी मैंने

Tuesday, April 7, 2009

इक पत्थर सी मैं पड़ी रही
तेरी यादों में बसी रही
दबी आवाज़ न सुना पायी
दिल की बात न बता पायी
ठोकर थी तेरी क़दमों की
तुझे वापस न बुला पायी
पड़ी हूँ इन सड़कों पे
तुझे आवाज़ न लगा पायी
दबती रही उन क़दमों तले
ख़ुद को न उठा पायी
रोज़ इक दुआ करती हूँ
उसका नाम लिए डरती हूँ
मिल जाऊं किसी छेनी से
इक अकार सी बन जाऊं
दिल की करार सी बन जाऊं
इक हो जाऊं तुझ से मैं
तेरे मकबरे पे लगाया पत्थर बन जाऊं

Friday, April 3, 2009

खुशबू महेकती रही, तेरे जाने तक
कुछ गुल खिला जाते तो क्या होता
खिले तो न रहते हम जानम
उन काटों का वास्ता रहा होता
जान ऐ दिल के छिन जाने के हम आदि
धड़कते दिल को भी चुरा लिया होता
मुह मोड़ के गुज़र जाने रही आदत तुमको
तुम्हें भुलाने का रास्ता बता दिया होता