Wednesday, November 23, 2011

चाँद से भरी रातों में अक्सर सोचा करते थे
लम्हों की बेलों से अक्सर कुछ यादों के फूल टूटा करते थे
बिखरते थे वो कुछ ख्वाबों से, सुन्दर सी इक ओढ़नी की तरह
खुशबू उनकी महकाती थी, उन यादों को फिर इक मृगतृष्णा की तरह 
झूल जाती वो कभी हलकी सी पवन में ऐसे 
के दबे पाँव कुछ नटखट सा करने को हो जैसे 
पल दो पल वो घबरा के चुप सी रह जाती
जब कोई पास से गुज़र जाता 
फिर उस पवन में बिखर जाती 
टूटे इक ख्वाब की तरह

Thursday, November 17, 2011

कुछ ज़ख्मों को आज भी ताज़ा रखा है
उन की यादों को आज भी सजा कर रखा है

Friday, November 4, 2011

दो इंसान इक दिल से धड़क सकते हैं
इक उम्मीद पे यह रास्ते कट सकते हैं
लेकिन, हर दिल की उम्मीद इक सी नहीं है
मोहब्बत का नाम ज़िन्दगी नहीं है

Wednesday, August 10, 2011

कुछ अनकही बातें
कुछ उखड़े सवाल
कुछ बीते लम्हे
कुछ बिखरे बाल
वो वक़्त के कुछ अजीब पहलु
बार बार सुना जाते हैं
के हम वो न थे
के हम वो न थे

जब किसी बात पे
खुली ज़िन्दगी
इक उमंग भरी
कली फिर खिली
वो तो इक ख्वाब ही था
वो तो इक ख्वाब ही था

इन बातों को बीते इक अरसा हुआ
गुज़रा वो ज़माना
मैं नहीं था
मैं नहीं था

गर बढ़ाए होते कदम
तो शायद, पर
मैं नहीं था
मैं नहीं था


Wednesday, February 2, 2011

रिश्ते सिर्फ खुशियों से बनते अगर

तो रिश्ते ही होते

टूटे उन सपनों को बाँधने को

इन दर्द भरे एहसासों के नगमे भी होते

करते बयां यूं तहरीक जिंदगी

हम भी कुछ ऐसे लिख रहे होते