कुछ अनकही बातें
कुछ उखड़े सवाल
कुछ बीते लम्हे
कुछ बिखरे बाल
वो वक़्त के कुछ अजीब पहलु
बार बार सुना जाते हैं
के हम वो न थे
के हम वो न थे
जब किसी बात पे
खुली ज़िन्दगी
इक उमंग भरी
कली फिर खिली
वो तो इक ख्वाब ही था
वो तो इक ख्वाब ही था
इन बातों को बीते इक अरसा हुआ
गुज़रा वो ज़माना
मैं नहीं था
मैं नहीं था
गर बढ़ाए होते कदम
तो शायद, पर
मैं नहीं था
मैं नहीं था