Thursday, December 11, 2008

दूरियों पे रहने वाले

जाने कैसे आज उन्हें हमारी याद आई, जाने कैसे वो जुबां लड़ा गए
उनके चुप रहने के आदि हो चुके थे, जाने कौन आज उनपर हावी हो आए

दो बातें की तो सही चाहे उल्फत की ही , जाने कब तक वो अल्फाज़ कान में गुनगुनाये
दूरियों पे रहने वाले, जाने आज हमारा रास्ता कहाँ भूल आए

4 comments:

  1. कलम से जोड्कर भाव अपने
    ये कौनसा समंदर बनाया है
    बूंद-बूंद की अभिव्यक्ति ने
    सुंदर रचना संसार बनाया है
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

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  2. kya baat hai bahut khub bahut unda........
    sidhe dilse awaj nikli hai,......akshaya-mann
    ๑۩۞۩๑वंदना शब्दों की ๑۩۞۩๑

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  3. आपका ब्लॉग देखा. बहुत अच्छा लगा. आपके शब्दों को नित नई ऊर्जा मिलती रहे और वे जन साधारण के सरोकारों का समर्थ और सार्थक प्रतीकन करें, यही कामना है.
    कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी पधारने की कृपा करें-
    http:www.hindi-nikash.blogspot.com
    सादर-
    आनंदकृष्ण, जबलपुर.

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