जाने कैसे आज उन्हें हमारी याद आई, जाने कैसे वो जुबां लड़ा गए
उनके चुप रहने के आदि हो चुके थे, जाने कौन आज उनपर हावी हो आए
दो बातें की तो सही चाहे उल्फत की ही , जाने कब तक वो अल्फाज़ कान में गुनगुनाये
दूरियों पे रहने वाले, जाने आज हमारा रास्ता कहाँ भूल आए
swaagat hai
ReplyDeleteकलम से जोड्कर भाव अपने
ReplyDeleteये कौनसा समंदर बनाया है
बूंद-बूंद की अभिव्यक्ति ने
सुंदर रचना संसार बनाया है
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
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kya baat hai bahut khub bahut unda........
ReplyDeletesidhe dilse awaj nikli hai,......akshaya-mann
๑۩۞۩๑वंदना शब्दों की ๑۩۞۩๑
आपका ब्लॉग देखा. बहुत अच्छा लगा. आपके शब्दों को नित नई ऊर्जा मिलती रहे और वे जन साधारण के सरोकारों का समर्थ और सार्थक प्रतीकन करें, यही कामना है.
ReplyDeleteकभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी पधारने की कृपा करें-
http:www.hindi-nikash.blogspot.com
सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर.