Thursday, December 11, 2008

रिश्ते

बाग़बान से पूछे क्या होगा, गुलिस्तान उसके दामन में तो है
फूलों से सजे बुतों को क्या होगा, कांटे हमारे बंधन में तो है
एक बराबर कोई नहीं, ना फूल ना तुम
एक उठाये क्या होगा, चाहत में सारे रिश्ते तो हैं

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