नाफ्सियात - a collection of words
A few words strung together that made sense to me.
Friday, December 26, 2008
इंतज़ार
बूँद बूँद कर गिरे आँसू, धार बन बह जाने को
इक इक कर मुरझाये फूल, बारिश के आने को
जो यह आंसू खरे न होते ऐ फूलों तुम पे रो लेता
सींच न पता तेरे जड़ों को, कुछ तो भिगो देता
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