आना जाना लगा रहा उसकी गलियों में
बिछड़ने के ख्याल से कदम मोड़ लेते
तसव्वुर का साथ रहा
वरना ज़िन्दगी का साथ छोड़ देते
जो गलती से कटे रास्ते हमारे
दबे अरमान फ़िर उभर आयेंगे
मुह फेर लेना दुआ करता हूँ
छुपते छुपाते हम भी चले जायेंगे
जो गलती से दिखे मेरा तसव्वुर
आँख बंद कर उसे मिटा देना
मृगतृष्णा समझ कर कोई
हमें भुला देना
bahut khoob
ReplyDeletesach kaha hai aapne. isi tarh nirantar likhte rahiye.
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