Monday, December 22, 2008

झूठे हैं तेरा रास्ता दिखाने वाले

दिन के उजालों में बदलते रहे उभरने वाले
रात की अंधेरों में दिखे कुछ चिरागों वाले
उनके नक्शे कदम पे चलते तो रहे
उनकी ठोकरों पे हम गिरने वाले
बताया था मुझको की तू गुज़रा यहाँ से कभी
या झूठे हैं तेरा रास्ता दिखाने वाले
जो हमारे हाथ चिराग पकडाया होता
होते कुछ कम अंध विश्वासों पे चलने वाले

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