Wednesday, December 17, 2008

लहरों से आए, बहा ले गए जाने कब हमको
क्या पता था यूं सहराओं पे छोड़ चले जायेंगे
दिल पे लगा ज़ख्म तो भर जाएगा
वो कम्भाक्त काँटा ना निकाल पाएंगे

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