थे करीब हम भी कभी, एहसान ऐ मुलाकातें आज भी हैं
दोस्ती रोज़ निभाते रहे, कुछ दबी बातें आज भी हैं
एहसासों को बांटे ज़माने हुए, दामन पे दाग आज भी हैं
दफन किया रोज़ मोहब्बतों को, ज़ुबान पे नाम आज भी है
इनकार ऐ हकीक़त रहा मुशकिल, जाने कैसे करते रहे
उनके देखे जीते रहे, राज़ ऐ मोहब्बत लिए मरते रहे
सुंदर अभिव्यक्ति !
ReplyDeleteबहुत बढिया!!
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