Friday, December 5, 2008

दीदार

आशिकों की कोई तकदीर नहीं होती,
करार-ऐ-मोहब्बत छोड़ कोई उम्मीद नहीं होती
ऐ तदबीर लिखने वाले तकदीर लिखी किसने तेरी,
के दीदार ऐ मोहब्बत तेरी कभी पूरी नहीं होती

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