Friday, December 5, 2008

उलझे ख्याल

बेवजह तंग करना तेरी आदत रही, देकर छीन लेना तेरी आदत रही
तुझसे क्या फरियाद करुँ, बच्चों सी हरकतें तेरी आदत रही

जो तू न होता नादान, आलिम होता कोई
जो होती मोहब्बत कभी तुझको, इंसान होता कोई

तकदीर लिखना तो आसान रहा तेरा, कभी जी भे ले
तमाशाई ज़िन्दगी बहुत देख ली, ग़म के आंसू कभी पी भी ले

आ'ईनाह-साज़, खालिक, याज्दान जाने और कितने नाम तेरे
इक फरियाद कर कबूल, आशिकी जो न मंज़ूर तो खुदाई तो दे

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