दिल में बसी हैं, तेरी ही यादें,
आशिक सा मैं हूँ, दुआओं में तू
आखों में तेरी, मेरी ही सूरत
बाकी है अब भी, तेरी आरज़ू
कुछ तो बता दे, क्या कमी है
खामोश सी क्यों है, क्या है जुस्तजू
छोड़ो यह बातें, बाँहों में आके
दिल में समाके, बस जा तू
फैला दे जुल्फें, आँचल सी तेरी
तुझ से लिपट के, महकी सी बातें सुनूँ
उन आसुओं में बह न जाऊं
उन घटाओं में साथ उडूं
आ जाओ मेरी जान ऐ तमन्ना
दिल में हैं जो बातें, तुझसे करुँ
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