रोशिनी होगी उन अंधेरों की कभी कहते हैं
मुझे अंधेरों के सिवा कुछ दिखता ही नहीं
हर कदम पे साथ रहेगा कहते हैं
ठोकरों के सिवा कुछ मिला ही नहीं
सर्वज्ञानी वो खुदा कर्म साथी सबका कहते हैं
एक टुक कर्म करता रहा पर साथ मिला ही नहीं
बंधा तेरा नसीब तेरे नाम से कहे वही लोग
सन्नाटों के सिवा कुछ सुनाई देता ही नहीं
अंध विश्वासी वो लोग, रास्ता दिखाए वो जो उन्हें फला ही नहीं
अंध विश्वासी मैं जिसने दिल की कभी सुनी ही नहीं
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