Wednesday, August 10, 2011

कुछ अनकही बातें
कुछ उखड़े सवाल
कुछ बीते लम्हे
कुछ बिखरे बाल
वो वक़्त के कुछ अजीब पहलु
बार बार सुना जाते हैं
के हम वो न थे
के हम वो न थे

जब किसी बात पे
खुली ज़िन्दगी
इक उमंग भरी
कली फिर खिली
वो तो इक ख्वाब ही था
वो तो इक ख्वाब ही था

इन बातों को बीते इक अरसा हुआ
गुज़रा वो ज़माना
मैं नहीं था
मैं नहीं था

गर बढ़ाए होते कदम
तो शायद, पर
मैं नहीं था
मैं नहीं था


1 comment:

  1. Subhan allah ! kya bath hai, bahut gaharai hai en pankatiyome!

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