Tuesday, September 29, 2009

हलकी सी बारिश
इक प्याला चाय
कुछ गुज़रे लम्हें
फ़िर याद आ जाए

वोह हलकी सी खुशबू
इक बहकी सी हँसी
दबी पैरों की आहट
उन सफों पे हलकी सी नमी

उन बद्रों से घिरे
तेरी बालों की छांव
तेरी छोटी सी आंखों
में इक चमक सी थी

पंखडियों से तेरे लब
थार थार कांपते हुए
उन गर्म साँसों में
मदहोशी सी थी

ख्वाब सी लगती
तेरी अंगडाई
आज ना जाने
ख्वाब सी फ़िर टूट गई

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