उन आंखों से बहे आंसूओं को पानी न समझो
उन आंसूओं में इक कतरा खून भी मिला हुआ है
जो कभी वो मुस्कुरा भी दिए
उनके दिल में इक काँटा चुब रहा है
गर पोंछ सको तो उन भीगे गालों को पोंछ दो
के उन के आंखों में इक समुन्दर छुपा है
न मारो पत्थर उन लहरों को
के उन लहरों में इक तूफ़ान छुपा है
छोड़ दो देना साथ अपना, के बुझ चुके कई मशाल
इस रौशनी को ठंडे अंगारों का क्या पता है
झुलसते रहे अंगार इतने
के दर्द में आज तड़पने का कुछ और ही मजा है
मेरा दिल है "प्यासा" मेरा दिल अकेला सिर्फ़ तेरे लिए ...........
ReplyDeleteबहुत ही खुबसूरत है आपके ख्वाब ........बहुत ही सुन्दर रचना
bahut hi gahari baat hai in pankatiyo ......jo aatmiyatata pradan karata hai .......badhaaee