इक अजनबी, झोंका सा बन आकर चला गया
अपने होने का एहसास दिला कर चला गया
धुन्दला सा चेहरा दिखा कर कुछ लम्हे
मुलाकात के बढा कर चला गया
क्या चाहता था, जानता नहीं
लेकिन वो मेरे वजूद का हिस्सा बनकर चला गया
तोड़ गया इक टहनी
अपने से जोड़ते चला गया
उसके वजूद का हिस्सा क्या मैं
मेरे वजूद का हिस्सा क्या वो
बे-एहसास वो आया था
बे-एहसास वो चला गया
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