जंजीरों में बाँध खजाना भी दोगे तो क्या होगा
टूटे रिश्तों की डोर पकड़ा कर खुदा भी दोगे तो क्या होगा
कटी है उम्र तेरे सायों में, पनाह न दोगे तो क्या होगा
तसव्वुर रहा हमेशा तेरा सामने मेरे, असलियत में क्या होगा
सवालों में कटी ज़िन्दगी, जवाब न दोगे तो क्या होगा
आखों को मूँद कर सो जाऊं, शायद येही तकदीर मेरी
गर न उठा तो क्या होगा
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