Friday, January 30, 2009

तेरी आंखों में ख़ुद ब ख़ुद जाने कैसे डूब जाता हूँ
झलक सी तेरी रहती है बस मैं जाने कहाँ खो जाता हूँ
बंद तेरी पलकों में मेरी चाहतें, मेरा प्यार
बंद तेरी पलकों में मेरी ज़िन्दगी जाने में कैसे जीता हूँ

1 comment:

  1. ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजिये ...

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